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Gyanvapi Masjid : ज्ञानवापी मस्जिद केस की इतिहास , लेटेस्टन्यूज़, Gyanvapi Mosque Case in Hindi 2024 Latest News

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Gyanvapi Masjid
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ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid)

भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी में अवस्थित ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) है. जहां हिंदू पक्ष ने दावा किया है कि जहां पर ज्ञानवापी मस्जिद बनी हुई है या मस्जिद बनने से पहले हिंदू धर्म के पवित्र भगवान भोले नाथ जी का मंदिर था. मंदिर को मुगल आक्रमण कारियों द्वारा तोड़ के यहां पर मस्जिद का निर्माण कर वाया था.

आपको बता दे की ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) को आलमगीर मस्जिद के नाम से भी जाना जाता है. वही मुस्लिम संस्थाओं का कहना है कि उस जगह में पहले से ही मस्जिद है और हिंदू पक्ष का दवा बिल्कुल भी गलत है. और यह मस्जिद काशी विश्व नाथ मंदिर केबिल्कुल सटी हुई है. तो आईए जानते हैं वर्तमान में चल रही ज्ञानवापी मस्जिद विवाद का पूरा इतिहास जानते हैं बिस्तर में.

ज्ञानवापी मस्जिद का इतिहास (Gyanvapi Masjid History)

जब मुग़लकल में औरंगजेब द्वारा 1669 में उस जगह प्राचीन मंदिर हुआ करता था जहां पर भगवान शिव की मूर्ति थी. उसे वक्त औरंगजेब द्वारा उस मंदिर को नष्ट कर दिया गया और इस मंदिर के ऊपर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण करवाया गया था. ज्ञानवापी का मतलब संस्कृत भाषा में ज्ञान का कुआं होता है. आपको पता ही होगा इस मुद्दा को लेकर 1991 से ज्ञानवापी मस्जिद को हटाकर वहां पर मंदिर बनाने के लिए कानूनी लड़ाई अदालत में जारी है.

लेकिन अभी तक इसकी सुनवाई पूर्ण रूप से नहीं हो पाई है. हालांकि 2020 के बाद से ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) मुद्दा काफी ज्यादा गरमाई है. क्यों कि हिंदू पक्ष के संग द्वारा लगातार इस मामले की सुनवाई करवा रही है और साथ में कहीं सारे महत्वपूर्ण सबूत भी पेश कर रही है. इसी मामला में 2022 में मस्जिद का सर्वे होने के बाद मस्जिद के बज्जू खाने में 12.8 व्यास का एक भगवान शिव का शिवलिंग भी प्राप्त हुई थी. इस शिवलिंग को मुगलों के आक्रमण से बचने के लिए उस वक्त के तत्कालीन मुख्य पुजारी के द्वारा ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) में अवस्थित एक कुएं में छुपा दिया गया था.

ज्ञानवापी मस्जिद बनने से पहले का इतिहास

ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) बनने से पहले इस जगह पर हिंदुओं के भगवान शिव की रूप विश्वेश्वर मंदिर हुआ करता था. इस भगवान शिव की मंदिर को निर्माण अकबर के एक प्रमुख दरबारी द्वारा16वीं शताब्दी के अंत में महाराष्ट्र और बनारस के एक प्रमुख परम ब्रह्म विद्वान नारायण भट्ट के साथ मिलकर बन वाया गया था. इस भगवान शिव की मंदिर ने बनारस को ब्राह्मण सौभाग्य के एक प्रतिष्ठ केंद्र के रूप में स्थापित करने में योगदान दिया था जिसने पूरे उपमहाद्वीप के विद्वानों को आकर्षित किया था.

मंदिर बनने से पहले की इतिहास

जिस स्थान पर ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) है उसे जगह में मंदिर बनने से पहले का इतिहास को देखा जाए तो इस स्थान पर क्या अस्तित्व रहा होगा इस सवाल पर कहा जाए तो इस तरह के इतिहास का स्थानीय हिंदू और मुस्लिम आबादी द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध किया गया था. मस्जिद के इतिहास के हालिया विवरण को देखते हुए जैसा कि हिंदुओं द्वारा प्रसारित किया गया है मूल मंदिर के बार-बार विनाश और पुनर्निर्माण के आसपास ही केंद्रित होती है. मस्जिद में पहले जो मंदिर थी कथित तौर पर 1193-94 ईसा पूर्व में कन्नौज के जयचंद्र की हार के बाद घुरिड्स 

 द्वारा उखाड़ दिया गया था. और उसके कुछ सालों बाद इस स्थान पर रजिया मस्जिद का निर्माण किया गया था. फिर 1211 और 1266 ईस्वी में गुजरात की एक व्यापारी द्वारा पुनः उस मंदिर का पूर्ण निर्माण किया गया था. जिसे जैनपुर सल्तनत के हुसैन शाह सरकी ने 1447 और 1458 के बीच में दोबारा नष्ट कर दिया गया था. उसके बाद फिर1489 और 1517 के बीच दिल्ली के सल्तनतअकबर के शासनकाल के दौरान राजा मानसिंह ने मंदिर का पूर्ण निर्माण करवाया था. लेकिन यह फिर से औरंगजेब द्वारा फिर से नष्ट किया गया..

अब जानते हैं ज्ञानवापी मस्जिद का इतिहास स्टेप बाय स्टेप

अब नीचे हम लोग यहां पर ज्ञानवापी मस्जिद को फोकस करते हुए कुछ जानकारी जताने की प्रयास की है कि अब तक इस मुद्दे में क्या-क्या हुआहै.

आदिकाल

हिंदू धर्म और पुराणों के अनुसार कहां जाए तो उत्तर प्रदेश के बनारस में एक बड़े मंदिर में आदिलिंग के तौर पर भगवान शिवलिंग स्थापित हुई थी. और यहां पर भगवान शिव जी का मंदिर बनाया गया था.

प्राचीन काल : प्राचीन काल में राजा हरिश्चंद्र के द्वारा ईसा पूर्व 11वीं के आसपास में काशी विश्वनाथ मंदिर का पूर्ण निर्माण करवाया गया था. उसके बाद इस मंदिर का अपने कार्यकाल के दौरान सम्राट विक्रमादित्य के द्वारा भी एक बार फिर इस मंदिर का पूर्ण निर्माण करवाया गया था.

साल 1194

1194 में जब मोहम्मद गौरी अपनी विशाल इस्लामी फौजी के साथ भारतको लूटने के इरादे से आया था. और आने के बाद इन्होंने वहां पर कहीं मंदिरों को तोड़ने के बाद उसकी नजर काशी विश्वनाथ के मंदिर पर पड़ी और उसने इस मंदिर पर भी हमला बोल दिया और कई पुजारी की हत्या की और लूटपाट की और अंत में मंदिर को भी तुड़वा दिया गया था. 

साल 1447

1447 में काशी के स्थानीय हिंदू द्वारा आपस में मिलकर एक बार फिर से उस मंदिर का पूर्ण निर्माण किया गया. लेकिन उसके बाद फिर से जैनपुर में शासन करने वाले सुल्तान मोहम्मद शाह के द्वारा इस मंदिर को तुड़वा कर मंदिर के ऊपर मस्जिद का निर्माण करवा दिया था.

साल 1585 

1585 में दोबारा हिंदू भक्तों की भक्ति को देखते हुए पंडित नारायण भट्ट के द्वारा इस मंदिर को फिर से बनवाया गया और इस मंदिर को बनाते वक्त उसे वक्त के राजा टोडरमल ने इस मंदिर को दोबारा बनाने में सहायता भी की थी. और उसे वक्त काशी विश्वनाथ के मंदिर काफी विशाल बनकर तैयार भी हुआ था.

साल 1632 

1632 में उसे वक्त के मुगल शासक शाहजहां के द्वारा एक आदेश पारित किया गया था और मंदिर को तुड़वाने के लिए अपनी विशाल सी को भेजा गया था. लेकिन शाहजहां कि विशाल फौजियों की सामना जांबाज हिंदुओं से हुआ जिसकी वजह से मुगलों की फौज ने विश्वनाथ की मंदिर को तोड़ने मेंअसफल रहे. लेकिन इसके बदले काशी में अवस्थित 63 अन्य मंदिरों को नष्ट कर दिया.

साल 1669

साल 1669 में 18 अप्रैल के दिन औरंगजेब के द्वारा काशी के विश्वनाथ मंदिर को तोड़ने का आदेश दिया गया था. यदि आप इस आदेश को देखना चाहते हैं तो आप एशियाटिक लाइब्रेरी जो कोलकाता में अवस्थित है वहां पर जाकर आप इस आदेश को देख सकते हैं आज भी इस आदेश को उसे लाइब्रेरी में सुरक्षित रखा गया है. 

साल 1669 

साल 1669 में जब औरंगजेब के आदेश के बाद उनके मुगल फौजी काशी पहुंची और वहां पर काफी बड़ी लूटपाट के साथ मंदिर को भी तोड़ दिया गया और मंदिर को तुड़वाने के बाद औरंगजेब ने उस के बाद उसे जगह पर ज्ञानवापी के परिसर में इस्लामी मस्जिद को बनवा दिया गया.

साल 1735 

जब औरंगजेब ने वहां पर मंदिर को नष्ट करके मस्जिद बनवाया था उसके बाद अगले 125 साल तक काशी में कभी किसी मंदिर का निर्माण नहीं करवाया गया था. लेकिन साल 1735 में इंदौर की महारानी देवी अहिल्याबाई के द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर को ज्ञानवापी के परिसर में ही बनवाया गया. 

साल 1809 

साला 1809के बाद बड़े पैमानों पर हिंदू समुदाय द्वारा ज्ञानवापी मस्जिद को हिंदू पक्ष को देने की डिमांड की गई. जिसके कारण उसे वक्त मुसलमान और हिंदुओं में काफी ज्यादा तनाव भी हुई थी. तब से लेकर अभी तकयह मुद्दा काफी ज्यादा गर्मी हुई है.

साल 1829 

साल 1829 में बनारस के पंडितों से सूचना मिलने के बाद उसे वक्त के तत्कालीन ग्वालियर की महारानी वैजाबाई के द्वारा इसी मंदिर में ज्ञानवापी के मंडप का निर्माण करवाया गया था और महाराज नेपाल के द्वारा यहां पर एक बहुत ही बड़ी प्रतिमा को स्थापित भी की गई थी.

साल 1883 

सन 1883 मेंपहली बार जमा मस्जिद ज्ञानवापी के तौर पर राजस्व डॉक्यूमेंट में ज्ञानवापी मस्जिद का पहला जिक्र रिकॉर्ड के तौर परदर्ज किया गया था.

साल 1936

सन 1936 में ज्ञानवापी पर एक मुकदमा दायर किया गया था जिसका फैसला 1 साल बाद आया था. और इस फैसले में कहां गया कि ज्ञानवापी एक मस्जिद है.

सन 1984

सन 1984 के बाद हिंदुओं की जन भावनाओं को देखते हुए विश्व हिंदू परिषद के द्वारा कुछ अन्य राष्ट्रवादी संघ संगठनों के साथ बातचीत करके देश में बड़े पैमान पर राष्ट्रीय वापी अभियान को शुरू किया गया. वहां पर ज्ञानवापी मस्जिदकी जगह पर हिंदू मंदिर का निर्माण करवाने के उद्देश्य से यह सारा चीज किया गया. 

ज्ञानवापी मस्जिद के पूरा मामला

सन 1991 में ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) और संपूर्ण परिषद में सर्वे और पूजा के लिए अदालत में एक याचिका दायर किया गया था. और यह याचिका हिंदू पक्ष की तरफ से दायर की गई थी. और इस मामले में याचिका दायर करने वालों में हरि हर पांडे, प्रोफेसर राम रंगशर्मा, सोमनाथ व्यास इत्यादि लोग शामिल थे. यह याचिका दायर करने के बाद संसद के द्वारा उपासना स्थल का कानून का निर्माण किया गया.

और यहां पर यह कहा गया की 15 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आए किसी भी धर्म के पूजा स्थल को दूसरे में बिल्कुल भी नहीं बादल कर सकते हैं. इसके बाद फिर से 1993 में ज्ञानवापी मस्जिद विवाद को देखते हुए उत्तर प्रदेश के हाई कोर्टने स्टे लगा दिया गया. और यथा स्थिति को बरकरार रखने का आदेश दिया गया. उसके बाद फिर से 1998 में कोर्ट के द्वारा मस्जिद के सर्वे की परमिशन दे दी गई.

लेकिन इलाहाबाद के हाईकोर्ट में इसी मामला को लेकर मस्जिद प्रबंधन समिति के द्वारा याचिका दायर की गई और सर्वे की परमिशन को रद्द करने के लिए कहा गया था और फल स्वरुप स्वरूप ऐसा ही हुआ. उसके बाद कोर्ट ने परमिशन को रद्द कर दिया. सन 2018 में जब यह बात सुप्रीम कोर्ट में गई और वहां पर कोर्ट के आदेश की अवधि को तकरीबन 6 महीने के लिए बढ़ाया गया. इसके बाद 2019 में उत्तर प्रदेश के वाराणसी कोर्ट में एक बार फिर से ज्ञानवापी मस्जिद मामला में मंदिर परिषद के मामले की सुनवाई शुरू हो गई.

उसके बाद 2021 में हिंदू पक्ष की तरफ से कुछ महिलाओं के द्वारा कोर्ट में एक याचिका को दायर किया गया. इस याचिका में डिमांड की गई थी की मस्जिद (Gyanvapi Masjid) परिसर में मौजूद श्रृंगार गौरी मंदिर में उन्हें पूजा करने की अनुमति दिया जाए और उसका सर्वे भी किया जाए. इस याचिका के बाद कोर्ट के द्वारा ज्ञानवापी मस्जिद के पुरातात्विक सर्वे की अनुमति दे दी गई. फिर 2022 में कोर्ट के आदेश के बाद कर्कियोलॉजी सर्वे आफ इंडिया के द्वारा ज्ञानवापी मस्जिद के काम को शुरू किया गया. और इस सर्वे को समय में पूरा किया गया. अब इसी मामले में अभी सुनवाई चल रही है.

क्या कहती है ज्ञानवापी सर्वे की रिपोर्ट (Gyanvapi Masjid Report )

जब कोर्ट के द्वारा सर्वे के लिए आदेश जारी की गई तो रिपोर्ट के आधार पर जो दावे ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) में की गई थी उसका काफी ज्यादा असर देखने को मिल रहा है. विश्व हिंदू परिषद की तरफ से वकील विष्णु शंकर जैन के द्वारा 25 जनवरी को कहा गया है कि जो रिपोर्ट ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) के सर्वे से आई है वह रिपोर्ट कल 839 पेजों की है. और रिपोर्ट के अनुसार बताया गया है कि ज्ञानवापी मस्जिद पर हिंदू मंदिर अवस्थित था. जहां पर औरंगजेब द्वारा मस्जिद का निर्माण किया गया था.

आगे शंकर जैन ने बताया कि सर्वे के दौरान तहखाना में दो हिंदू देवताओं की मूर्तियों के अवशेष मिले हैं. साथ ही ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) के निर्माण मैं स्तंभ सहित पहले से ही मौजूद मंदिरों के कुछ हिस्सों का भी इस्तेमाल किया गया था. इसके अलावा उन्होंने कहा कि फारसी भाषा में मंदिरों को कब तोड़ा गया और कब आदेश दिया गया वह भी एक पत्थर पर लिखा गया है. इसके अलावा ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) के पीछे की पश्चिम दीवार पर एक मंदिर की दीवार भी है.

क्या है ज्ञानवापी मस्जिद की असली विवाद (Gyanvapi Masjid Case)

आपको बता दे की हाल ही मेंअयोध्या में बनी भव्य राम मंदिर 22 जनवरी 2024 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम भव्य रूप से किया गया और यह मंदिर बनने का जो सफर था वह 500 साल से भी ज्यादा वक्त लगा था. कुछ इसी तरह का विवाद ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) के साथ भी देखने को मिल रहा है.

और इसी तरह का विवाद निकाल के सामने आ रही है क्योंकि जैसे अयोध्या में पहले बाबरी मस्जिद बनने से पहले मुगलो द्वारा वहां परराम मंदिर के मंदिर को तोड़कर बावरी मस्जिद बनाया था. इस तरह काशी विश्वनाथ का भी मामला लगभग इस तरह का है लेकिन फर्क इतना ही है कि अयोध्या में राम मंदिर के जगह मस्जिद को बनाया गया था लेकिन यहां पर मंदिर और मस्जिद दोनों ही बनाए हुए हैं इस विवाद में हिंदू पक्ष की तरफ से कहा जाता है कि 1669 में मुगलों ने काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़ दिया था.

और यहां पर ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) बनवाई थी. और हिंदू पक्ष के लोग1670 से ही इस ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) विवाद को लेकर लड़ाई कर रहे हैं. वहीं दूसरे तरफ मुस्लिम पक्ष का कहना है कि ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) में कभी कोई मंदिर बन ही नहीं था. और शुरू से ही इस मस्जिद पर मुसलमान के समुदाय लोग यहां पर अपना नवाज अदा करते आ रहे हैं.

ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़ी वर्तमान अपडेट (Gyanvapi Masjid News )

ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) विवाद से जुड़ी मुद्दे पर जनवरी के महीने में जबरदस्त अपडेट देखने को मिला. यहां पर विश्व हिंदू परिषद के द्वारा 32 सबूत को आधार बनाकर तर्क दिया गया है कि वाराणसी में अवस्थित ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) की जगह पर कभी बहुत बड़ा मंदिर हुआ करता था. 

निष्कर्ष

इस लेख में हमने जाना Gyanvapi Masjid : ज्ञानवापी मस्जिद केस की इतिहास , लेटेस्टन्यूज़, Gyanvapi Mosque Case in Hindi 2024 Latest News के बारे में आशा करता हूं आप लोगों को या लेकर जरूर पसंद आई हो यह यदि किसी तरह का कोई सुझाव या सलाह है तो नीचे हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट जरुर करें धन्यवाद.

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FAQs. 

Q. क्या ज्ञानवापी मस्जिद एक मंदिर थी?

A. ज्ञानवापी मस्जिद की निर्माण से पहले यहां पर एक हिंदू मंदिरथा.

Q. ज्ञानवापी का निर्माण किसने करवाया था?

A. जैनपुर के एक जमींदार ने बनवाया था 

Q. काशी क्यों प्रसिद्ध है?

A. वाराणसी काशी की भूमि सदियों से हिंदुओं के लिए सबसे बड़ी तीर्थ स्थान रहने के कारण प्रसिद्ध है.

Q. नया विश्वनाथ मंदिर किसने बनाया?

A. नया विश्वनाथ मंदिर को पंडित मदन मोहन मालवीय ने बनवाया था. 

Q. ज्ञानवापी मस्जिद में 7 11 क्या है?

A. वादपत्रों की अस्वीकृति पर कानून 

Q. Where is Gyanvapi Masjid

A. भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी में अवस्थित ज्ञानवापी मस्जिद है

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