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Manipur Violence | क्या है मणिपुर हिंसा जाने बिस्तर में, मणिपुर हिंसा कैसे हुआ शुरू, मणिपुर हिंसा क्या है पूरा मामला 2023

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Manipur Violence
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मणिपुर हिंसा की आग में जल रहा है. मणिपुर की सरकार ने बेहद विषम परिस्थितियों में हिंसा करने वालों को देखते ही गोली मारने का आदेश दिया. प्रदेश के अधिकांश जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया है. हालात को नियंत्रित करने के लिए सेना और असम राइफल्स के जवानों को तैनात किया गया है. हिंसा के मद्देनजर पूर्वोत्तर रेलवे ने मणिपुर जाने वाली सभी ट्रेनों को रद्द कर दिया है. पूरे राज्य में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को 5 दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया है.

हिंसा के कारण कई लोग विस्थापित हुए हैं. और कईयों की मौत भी हुई. भारतीय सेना के जनसंपर्क अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने बीबीसी को बताया कि सेना और सभी स्टेकहोल्डर्स 12 समन्वित कार्रवाई के माध्यम से स्थिति को नियंत्रण में लाया गया है. इससे पहले मणिपुर के मुख्यमंत्री एंडेन सिंह ने एक वीडियो बयान जारी कर राज्य के सभी समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील की थी.आइए जानते हैं विस्तार में मणिपुर हिंसा से जुड़ी सारी जानकारी के बारे में.

Table of Contents

मणिपुर हिंसा क्या है ? (What is Manipur Violence ?)

गृह मंत्री अमित शाह ने भी गुरुवार को मुख्यमंत्री से बात की और हालात का जायजा लिया था. लेकिन इस हिंसा के भड़कने की वजह क्या है दरअसल 19 अप्रैल को मणिपुर उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को 4 सप्ताह के भीतर मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति श्रेणी में शामिल करने के अनुरोध पर विचार करने के लिए कहा था.

कोर्ट ने अपने आदेश में केंद्र सरकार को भी इस पर विचार करने के लिए सिफारिश भेजने को कहा था इसी के विरोध में और ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन मणिपुर ने बुधवार को राजधानी इंफाल से करीब 65 किलोमीटर दूर चांदपुर जिले के इलाके में मैतेई आदिवासी एकजुटता मार्च रैली का आयोजन किया था. इस रैली में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए थे. कहा जा रहा है कि उसी दौरान हिंसा भड़क गई सबसे ज्यादा हिंसक घटनाएं विष्णुपुर और चुराचंदपुर जिले में हुई है. मणिपुर की आबादी लगभग 2800000 है.

इसमें मैं 23 समुदाय के लोग लगभग 53 फ़ीसदी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने का विरोध कर रही मैतेई जनजातियों में एक जातीय समूह है. जिसमें कई जन जातियां शामिल है मणिपुर में हो रही ताजा हिंसक घटनाओं ने राज्य के मैदानी इलाकों में रहने वाले थे.

समुदाय और पहाड़ी जनजातियों के बीच की पुरानी जातीय दरार को फिर से खोल दिया है. विरोध कर रही जनजातियों का कहना है कि मैं 23 समुदाय को पहले से ही एससी और ओबीसी के साथ आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग का आरक्षण मिला हुआ है. ऐसे में  मैतेई सब कुछ अकेले हासिल नहीं कर सकते. 

मैतेई आदिवासी नहीं है एससी ओबीसी और ब्राम्हण विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि अगर  मैतेई समुदाय को एसटी का दर्जा दे दिया गया. तो उनकी जमीनों के लिए कोई सुरक्षा नहीं बचेगी और इसलिए अपने अस्तित्व के लिए छठी अनुसूची चाहते हैं.

मणिपुर के एक वरिष्ठ पत्रकार बताते हैं, कि मैतेई समुदाय की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि पहाड़ी इलाकों में बसे लोग मैदानी इलाकों में जाकर बस सकते हैं. लेकिन  मैतेई लोग बस नहीं सकते कृषि भूमि में जनजातीय लोगों का दबदबा रहा है लिहाजा इस तरह की बातों को लेकर यह पूरा टकराव है.

मणिपुर में शूट एंड साइट के आदेश

मणिपुर में हालात इतने खराब हो चुकी है कि यहां के सेना को फ्लैग मार्च करना पड़ रहा है.  साथ ही वहां के कलेक्टर को मणिपुर सरकार के तरफ से जरूरत पड़ने पर शूट एंड साइट ऑर्डर दे दिया गया है.  मणिपुर के बहुत से जगह जैसे कि इंफाल,  विष्णुपुर,  चुराचंदपुर  और कांगपोकपी जैसे जगह में बहुत ही भयंकर  हिंसा भड़क गई है.  हालात को काबू में पाने के लिए सेना को मौके पर बुलाना पड़ा, 

फिर भी अभी हालात बहुत ही  संगीन बनी हुई है. इसी बीच राज्य में हुई इस जबरदस्त के कारण मणिपुर के मुख्यमंत्री एन वीरेंद्र सिंह ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि हिसाब भड़काने और उपद्रव मचाने वाले को कभी नहीं बख्शा जाएगा.  और उन्हें शक्ति से निपटाया  जाएगा.

उन्होंने आगे कहा यह सारी घटनाएं समाज के दो वर्गों में हुई गलतफहमी के कारण उत्पन्न हुई है.  और इस हिंसा का शांति बहाल करने की कोशिश सरकार कर रही है.  साथ ही इस ईशा को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मणिपुर के मुख्यमंत्री से बातचीत की है.

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मणिपुर हिंसा कैसे हुआ शुरू ? (How to Start Manipur Violence )

मणिपुर में हो रही हिंसा का कारण हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुआ है.  और हाईकोर्ट के आदेश आने के बाद मणिपुर का माहौल एकाएक बिगड़ने लगा.  दरअसल 14 अप्रैल को मणिपुर के हाईकोर्ट ने  मैतेई समुदाय के आरक्षण की नाग वाली याचिका में  हाई कोर्ट ने अपना फैसला  सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह केंद्र सरकार से इस याचिका की सिफारिश की जाए  और  मैतेई  समुदाय को उनकी हक दिलाया जाए. 

केंद्रीय सरकार के तरफ से इस याचिका पर मुहर लगते ही. मणिपुर हाई कोर्ट में मैतेई  सामुदायिक हो एसटी का दर्जा दिया गया और मणिपुर के दूसरे समुदाय  कुकी  समुदाय को इस फैसले से काफी नाराज हुए और हाईकोर्ट की इस आदेश के बाद ही मणिपुर के तमाम आदिवासी समुदाय ने इस आदेश  का विरोध करने लगे और इस फैसले के विरोध में दूसरे समुदाय के लोग कुकी और नागा जनजाति लगाइए कुमार अन्य  जनजातियों  ने जमकर  (मैतेई  और आदिवासी कुकी, नागा जाति और अन्य जनजाति के बीच ) हिंसा शुरू हो गई.

क्या था मैतेई समुदाय की मांग ?

 मैतेई समुदाय ने हाई कोर्ट से सिफारिश की थी कि उनकी परंपरा, संस्कृति और भाषा को बचाने के लिए  मैतेई  समुदाय को एसटी का दर्जा दिया जाएं. साथ ही मैतेई समुदाय का कहना है कि उनके पास पहले से ही कम  भूभाग है और वह भी धीरे धीरे कम होते जा रही हैं.  पहाड़ों में रहने  वाले भी इस भूभाग में आने लगे हैं. 

जिसके कारण दिन प्रतिदिन जमीनों के दाम बढ़ते जा रही है.  जिसे रोकने के लिए कोई कानूनी व्यवस्था भी नहीं है.  इसीलिए  मैतेई  समुदाय अपने लिए विशेष जाति का दर्जा की मांग करते आ रहे हैं.  और इस बात को लेकर हाईकोर्ट में सिफारिश की थी.  और अंत में हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनकी मांग पर मुहर लगा दी.

 कौन है मैतेई समुदाय ?

एक रिपोर्ट के मुताबिक मणिपुर में सबसे ज्यादा जनसंख्या  मैतेई  समुदाय की है. मणिपुर राज्य की कुल आबादी में लगभग 64  प्रतिशत मैतेई समुदाय की जनसंख्या है. लेकिन यह समुदाय अभिषेक 10 प्रतिशत भूभाग पर ही बसा हुआ है. और बाकी के 90% आवाज ही पहाड़ियों में रहते हैं. जिसमें राज्य की बाकी बची हुई आबादी रहती है. इस भूभाग में  कुकी,  नागा  लगाया था बाकी के संपूर्ण जनजाति रहते हैं.  जो  मैतेई  समुदाय  कि विरोध कर रहे हैं. 

क्यों हो रहा है  मैतेई  समुदाय का विरोध ?

 मैतेई समुदाय का विरोध करने वाली अन्य जनजातियों का कहना है कि  मैतेई  समुदाय एक काफी मजबूत समुदाय है.  और राज्य में उनकी  आबादी सबसे ज्यादा है.और वह लोग ज्यादातर शहरी इलाका में रहते हैं. और उन्हें अन्य समुदाय के तुलना में तमाम सुविधाएं मिलती है जो पहाड़ी इलाका में रहने वाले लोगों को नहीं मिल पाती है. साथ ही इसके बावजूद  मैतेई  समुदाय पहाड़ी इलाकों में घुसपैठ करने लगे हैं.  इसीलिए अन्य समुदाय के जनजाति मैतेई  समुदाय का विरोध कर रहे हैं.

मणिपुर में लैंड सर्वे के कारण विवाद

 मैतेई समुदाय के विरोध के  मणिपुर सरकार की ओर से कराए गए लैंड सर्वे ने पहाड़ी जनजातियों को और भी भड़काने का काम किया.  मणिपुर सरकार ने साल भर पहले लैंड सर्वे का काम करने का फैसला किया था. यह सर्वे पूरा चांद पूरा और इसके आसपास के इलाके के लिए हुआ था. 

इस सर्वे के बाद कुकी समुदाय के लोगों को कहां गया था कि वह रिजर्व फॉरेस्ट में आते हैं और उन्हें वह जगह खाली करना पड़ेगा.  इसके बाद ग्रामीण जनजातियों ने इसका विरोध किया और उन्होंने कहा कि इस बात कि कभी कोई जानकारी हमें नहीं दी गई थी.

मणिपुर हिंसा (Manipur Violence ) कैसे शुरू हुई ?

 हाईकोर्ट की इस फैसले के कारण 27 अप्रैल को  दी इंडीजिनियस ट्राइबल लीडर्स फोरम (ITLF )  संगठन ने सरकार के खिलाफ 8 घंटे का हड़ताल किया था.  और 28 अप्रैल को मुख्यमंत्री वीरेंद्र सिंह के एक जिम का उद्घाटन  करने वाले थे. 

इस उद्घाटन में मुख्यमंत्री के लिए जो मंच तैयार किया गया था.  उस मंच  मैं लोगों ने आग लगा दी. इस घटना को देखते हुए प्रशासन ने वहां पुलिस की तैनात कर दिया गया.  जिसके कारण हींग शाह रुकने के बजाय और फैलते गई.

जैसे पुलिस बल की तैनाती इसके साथ साथ और हिंसा बढ़ती गई और लोगों ने सड़कों पर उतर कर जमकर  जहां-तहां  तोड़फोड़ करने लगे और आगजनी करना शुरू करने लगे.  और रोड ऊपर जहां-तहां टायर जलाकर विरोध करने लगे.  जिसके कारण पुलिस बल और आंदोलन कर्मियों के बीच हिंसक झड़प भी हुए.

इससे खुश होकर लोगों ने 29 अप्रैल को भी जमकर आगजनी तोड़फोड़ किया.  साथ ही पूरे रात भर कई भवनों  मैं आग लगा के सब कुछ राख कर दिया.

Manipur Violence
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मणिपुर हिंसा (Manipur Violence ) छात्र संघ के संगठन के मार्च से और खतरनाक हुई हिंसा

लगभग 3 दिन तक हुई यह हिंसक को 30 अप्रैल तक पुलिस बल द्वारा कंट्रोल कर लिया गया था.  और पुलिस बल ने कुछ राहत की सांस  ले.  लेकिन यह हिंसा अभी बाकी थी.  क्योंकि उसके बाद लोगों ने हाई कोर्ट की फैसला मुद्दों को लेकर फुल से हिंसा शुरू होने लगी. 

लेकिन इस बार की हिंसा  उद्घाटन समारोह की आगजनी की नहीं बल्कि मैतेई समुदाय को एसटी के दर्जा मिलने को लेकर शुरू हुई. 3 मई को छात्र संगठन ऑल ट्राईबल स्टूडेंट यूनियन आफ मणिपुर (ATSUM) द्वारा  एक मार्च बुलाया गया और यह मार्च मैतेई समुदाय तू मांग और उसे नीचे समर्थन के खिलाफ बुलाया गया. इस मार्च में हजारों की संख्या में दूसरे समुदाय के जनजाति शामिल हुए थे. 

इसके बाद मणिपुर के अलग-अलग जिलों में मैतेई समुदाय के खिलाफ ऐसे बड़े-बड़े मार्च निकलने लगे.  जिसके कारण जगह-जगह पर हिंसा तो हो और आगजनी देखें माहौल बनते गया.  लोगों ने जमकर हंगामा किया और कई  घरों में आग लगा दी.  जिसके कारण मैतेई  समाज के लोग भी सड़क पर उतर आए और दोनों पक्षों में जमकर हिंसा होने लगी.  जिसके कारण मजबूरन सरकार को 8 जिले में कर्फ्यू लगाने का आदेश लेना पड़ा. 

और सरकार ने हिंसा में भाग लेने वाले लोगों को देखते ही गोली मारने की आदेश  दे दिया गया.  साथ ही मणिपुर में इंटरनेट पर  जब तक हिंसा खत्म नहीं हो जाती तब तक इंटरनेट पर पाबंदी लगा दिया गया.  अभी रिंग्स में प्रभावित क्षेत्र से हजारों लोगों को निकाला गया है और साथ ही वहां पर भारी मात्रा में सेनाओं की तैनाती की गई है. 

मणिपुर हिंसा(Manipur Violence ) में कितनी शिक्षाकर्मी की व्यवस्था की गई ?

राज्य में सुरक्षा बलों के 10,000 से ज्यादा जवानों को तैनात किया गया है.  इस कड़ी सुरक्षा के चलते इंफाल में लोगों  की सड़कों पर चहल-पहल शुरू हो गई है.

मणिपुर हिंसा (Manipur Violence ) में कितने लोग मरे ?

रिपोर्ट के मुताबिक मणिपुर हिंसा में 54 लोगों की मौत हुई है.  जिसमें 16  डेड बॉडी को पूरा चांदपुर के जिला अस्पताल के मुर्दाघर में रखा गया है. और 15 डेड बॉडी को जवाहरलाल नेहरू इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में रखा गया है.  साथ ही इंफाल के पश्चिम में स्थित राम फिल्में रीजनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के तरफ से 23 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है.

यह भी पढ़ें

FAQs

मणिपुर हिंसा क्या है ?

समुदाय और पहाड़ी जनजातियों के बीच की पुरानी जातीय दरार को फिर से खोल दिया है. विरोध कर रही जनजातियों का कहना है कि मैं 23 समुदाय को पहले से ही एससी और ओबीसी के साथ आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग का आरक्षण मिला हुआ है. ऐसे में  मैतेई सब कुछ अकेले हासिल नहीं कर सकते. 
मैतेई आदिवासी नहीं है एससी ओबीसी और ब्राम्हण विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि अगर  मैतेई समुदाय को एसटी का दर्जा दे दिया गया. तो उनकी जमीनों के लिए कोई सुरक्षा नहीं बचेगी और इसलिए अपने अस्तित्व के लिए छठी अनुसूची चाहते हैं.
मणिपुर के एक वरिष्ठ पत्रकार बताते हैं, कि मैतेई समुदाय की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि पहाड़ी इलाकों में बसे लोग मैदानी इलाकों में जाकर बस सकते हैं. लेकिन  मैतेई लोग बस नहीं सकते कृषि भूमि में जनजातीय लोगों का दबदबा रहा है लिहाजा इस तरह की बातों को लेकर यह पूरा टकराव है.

क्यों हो रहा है  मैतेई  समुदाय का विरोध ?

मैतेई समुदाय का विरोध करने वाली अन्य जनजातियों का कहना है कि  मैतेई  समुदाय एक काफी मजबूत समुदाय है.  और राज्य में उनकी  आबादी सबसे ज्यादा है.और वह लोग ज्यादातर शहरी इलाका में रहते हैं. और उन्हें अन्य समुदाय के तुलना में तमाम सुविधाएं मिलती है जो पहाड़ी इलाका में रहने वाले लोगों को नहीं मिल पाती है. साथ ही इसके बावजूद  मैतेई  समुदाय पहाड़ी इलाकों में घुसपैठ करने लगे हैं.  इसीलिए अन्य समुदाय के जनजाति मैतेई  समुदाय का विरोध कर रहे हैं.

कौन है मैतेई समुदाय ?

एक रिपोर्ट के मुताबिक मणिपुर में सबसे ज्यादा जनसंख्या  मैतेई  समुदाय की है. मणिपुर राज्य की कुल आबादी में लगभग 64  प्रतिशत मैतेई समुदाय की जनसंख्या है. लेकिन यह समुदाय अभिषेक 10 प्रतिशत भूभाग पर ही बसा हुआ है. और बाकी के 90% आवाज ही पहाड़ियों में रहते हैं. जिसमें राज्य की बाकी बची हुई आबादी रहती है. इस भूभाग में  कुकी,  नागा  लगाया था बाकी के संपूर्ण जनजाति रहते हैं.  जो  मैतेई  समुदाय  कि विरोध कर रहे हैं. 

मणिपुर हिंसा कैसे हुआ शुरू ?

मणिपुर में हो रही हिंसा का कारण हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुआ है.  और हाईकोर्ट के आदेश आने के बाद मणिपुर का माहौल एकाएक बिगड़ने लगा.  दरअसल 14 अप्रैल को मणिपुर के हाईकोर्ट ने  मैतेई समुदाय के आरक्षण की नाग वाली याचिका में  हाई कोर्ट ने अपना फैसला  सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह केंद्र सरकार से इस याचिका की सिफारिश की जाए  और  मैतेई  समुदाय को उनकी हक दिलाया जाए. 

क्या था मैतेई समुदाय की मांग ?

 मैतेई समुदाय ने हाई कोर्ट से सिफारिश की थी कि उनकी परंपरा, संस्कृति और भाषा को बचाने के लिए  मैतेई  समुदाय को एसटी का दर्जा दिया जाएं. साथ ही मैतेई समुदाय का कहना है कि उनके पास पहले से ही कम  भूभाग है और वह भी धीरे धीरे कम होते जा रही हैं.  पहाड़ों में रहने  वाले भी इस भूभाग में आने लगे हैं. 
जिसके कारण दिन प्रतिदिन जमीनों के दाम बढ़ते जा रही है.  जिसे रोकने के लिए कोई कानूनी व्यवस्था भी नहीं है.  इसीलिए  मैतेई  समुदाय अपने लिए विशेष जाति का दर्जा की मांग करते आ रहे हैं.  और इस बात को लेकर हाईकोर्ट में सिफारिश की थी.  और अंत में हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनकी मांग पर मुहर लगा दी.

 निष्कर्ष

 इस लेख में हमने जाना मणिपुर  के हिंसा के बारे में  आशा करता हूं आप लोगों को यह जानकारी जरुर पसंद आई हो यदि इस लेख से संबंधित कोई सुझाव या साला है तो हमें कमेंट जरूर करें धन्यवाद. 

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