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Saraswati Puja : सरस्वती पूजा पर निबंध, सरस्वती पूजा क्यों मनाया जाता है ? सरस्वती पूजा की परिचय

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Saraswati Puja

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हर साल की तरह इस बार भी Saraswati Puja की शुरुआत हो चुकी है. सरस्वती पूजा हर साल बसंत पंचमी के दिन मनाई जाती है. सरस्वती पूजा खास कर के हिंदू धर्म के त्योहारों का महत्वपूर्ण त्यौहार है. ऐसे भी सरस्वती पूजा अपने आप में ही बहुत महत्वपूर्ण पूजा होता है. क्योंकि सरस्वती मां को विद्या की देवी के रूप में पूजा जाता है.

बसंत पंचमी के दिन मनाए जाने वाली सरस्वती पूजा त्योहार प्राचीन काल से बहुत ही प्रचलित है इस दिन हिंदू धर्म लंबी के लोग माता सरस्वती की पूजा करके उनसे शांति समृद्धि और बुद्धि और सफलता के लिए कामना करते हैं. इसी तरह विद्यार्थी अपने स्कूल कॉलेज तथा घरों में सरस्वती माता की प्रतिमा की पूजा करके इस त्यौहार को धूम धाम से मनाते हैं. तो आईए जानते हैं सरस्वती पूजा पर निबंध और पूजा की महत्व के बारे में विस्तार में.

सरस्वती पूजा की परिचय (Saraswati Puja Introduction )

Saraswati Puja हर साल बसंत पंचमी के दिन ही मनाई जाती है. सरस्वती पूजा हिंदू धर्म के प्रमुख पर्व में से एक है. इस पर्व में माता सरस्वती की पूजा की जाती है. मां सरस्वती को ज्ञान की देवी के रूप में भी जान जाती है. हर साल आने वाली बसंत पंचमी का यह पर्व सदियों से चली आ रही  प्राचीन कल से प्रचलित है.

माता सरस्वती को विशेष विद्या की देवी के रूप में पूजा जाता है. इस दिन खास कर के विद्यार्थी माता सरस्वती की पूजा करके उनसे शांति समृद्धि बुद्धि तथा जीवन में सफलता पाने के लिए प्रार्थना करते हैं. सरस्वती पूजा को स्कूल तथा कॉलेज में भी माता सरस्वती का प्रतिमा की स्थापना करके धूम धाम से पूजा की जाती है.

त्योहार का नामसरस्वती पूजा
कब मनाई जाती हैहर साल बसंत पंचमी को
धर्महिंदू
2024 में सरस्वती पूजा कब है14 फरवरी 2024
देवीमाता सरस्वती 

सरस्वती पूजा क्यों मनाया जाता है ? (Saraswati Puja Kyoun Manaya Janta hai )

ज्ञान की देवी के रूप में पूजे जाने वाली माता सरस्वती को विशेष कर विद्यार्थियों का सबसे बड़ी पर्व है. हर साल मनाई जाने वाली सरस्वती पूजा को हर साल बसंत पंचमी के दिन Saraswati Puja का आयोजन की जाती है. सरस्वती पूजा के दिन लोग सबसे पहले एक जगह को निर्धारित करते हैं जहां पर माता सरस्वती की पूजा का स्थान के रूप में उसे अच्छी तरह सा सुथरा तथा सजाया जाता है.

और वहां पर माता सरस्वती की प्रतिमा तथा फोटो को विस्थापित करके सजाया जाता है. उसके बाद माता सरस्वती की पूजा पूर्ण विधि विधान के रूप में की जाती है. और उसके बाद लोगों पर प्रसाद भी बांटा जाता है. हर साल मनाई जाने वाली Saraswati Puja कोई मामूली पूजा नहीं है यह हिंदू धर्म के सबसे बड़े पूजा में से एक सरस्वती पूजा भी शामिल है. सरस्वती पूजा आज से नहीं बल्कि प्राचीन समय से ही प्रचलित है.

शास्त्रों के अनुसार माता सरस्वती की पूजा किसी भी क्षेत्र में कला तथा शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों को मां सरस्वती की पूजा अर्चना विधि विधान के साथ की जाती है. ऐसे तो माता सरस्वती की पूजा प्रति दिन करनी चाहिए खासकर के विद्यार्थियों को क्योंकि वसंत पंचमी के दिन Saraswati Puja करने का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाती है.इसीलिए भी सरस्वती पूजा को हर साल बसंत पंचमी के ही दिन मनाई जाती है.

सरस्वती पूजा कब मनाई जाती है ? (Saraswati Puja Kab Hai )

Saraswati Puja हर साल हिंदू कैलेंडर के अनुसार माघ महीने में शुक्ल पंचमी को तथा अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार जनवरी और फरवरी महीने के बीच में मनाया जाता है. इस समय वसंत का मौसम की शुरुआत होती है और वसंत चढ़ने के बाद बसंत की पांचवा दिन सरस्वती पूजा के रूप में मनाया जाता है. वसंत का मौसम बेहद खास इसलिए भी होता है क्योंकि बसंत रितु के मौसम में फलों का उत्पादन बहुत अच्छी होती है. हर जगह हरियाली होती है. इसीलिए वसंत रितु बहुत ही खूबसूरत होता है, जिसमें माता सरस्वती की पूजा धूमधाम से की जाती है. 

सरस्वती पूजा का महत्व (Saraswati Puja Important )

Saraswati Puja हिंदू धर्म की सबसे बड़े त्यौहार में से एक है. सरस्वती पूजा का महत्व अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह पूजा आज से नहीं बल्कि सदियों चली आ रही पूजा में से एक है. सरस्वती पूजा सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि भारत लगायत जहां-जहां हिंदू धर्म के लोग रहते हैं वहां-वहां सरस्वती की पूजा धूमधाम से की जाती है.

जैसे कि नेपाल, बांग्लादेश, लगाए देश मेंजहां पर हिंदूधर्म के लोग रहते हैं वहां वहां सरस्वती पूजा की महत्व है. सरस्वती पूजा कोहर साल बसंत पंचमी के रूप में मनाया जानेके कारण इस दिन को बसंत पंचमी के रूप में भी मनाया जाता है. बसंत पंचमी के दिन मनाए जाने वाली सरस्वती पूजा की उल्लेख हिंदू धर्म के धर्म ग्रंथो में भी किया गया है.

विशेष कर Saraswati Puja को  विद्यार्थियोंकी सबसे बड़ी पूजा है क्योंकि सरस्वती माता को ज्ञान की देवी के रूप में पूजा जाता है इसलिए विद्यार्थी अपने जीवन की सफलता तथा बुद्धि में विकास की प्रार्थना करते हुए मां सरस्वती पूजा की प्रार्थना तथा पूजा करके सरस्वती पूजा को काफी ज्यादा धूमधाम से मनाया जाता है. क्योंकि इस दिन माता सरस्वतीका पूजा करने से माता सरस्वती का कृपा तथा आशीर्वाद बना रहता है जिसके कारण लोगों में ज्ञान तथा बुद्धि में विकास होती है.

सरस्वती पूजा का इतिहास (Saraswati Puja History )

पौराणिक शास्त्रों के अनुसार Saraswati Puja की भी कई सारे पौराणिक कथाएं हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार जब भगवान ब्रह्मा नेइस जगत की रचना की थी तब सभी जीव जंतु तथा वनस्पतियों का निर्माण किया था. लेकिन भगवान शिव के अनुसार ब्रह्मा ने इस जगत की निर्माण तो कर दी लेकिन फिर भी सारा जगत अभी भी मुक्त तथा रंगहीन है.

इसी बात को ध्यान में रखते हुए भगवान शिव ने विश्व परम रचयिता ब्रह्मा से यह अनुरोध करते हैं कि इतने बड़े संसार के निर्माण के बावजूद अभी भी यह जगत अधूरा सा लग रहा है. सभी ऋषि मुनियों और देवी देवताओं ने मिलकर इस समस्या का निवारण करना चाहा लेकिन फिर भी इस समस्याओं का निदान नहीं हो पा रही है. इस बात से चिंतित होते हुए श्री विष्णु जी की स्तुति की. इसके बाद भगवान विष्णु तुरंत उनके समक्ष प्रकट हुए.

और जगत के रचयिता ब्रह्मा जी के बताए अनुसार उन्होंने समस्या का समाधान ढूंढने के लिएआदिशक्ति की याचना की. वहां पर जब मां आदिशक्ति दुर्गा देवों के समक्ष प्रकट हुई तो उन्होंने समस्या को समझ कर सृष्टि को और भी सु स्वीट करने के लिए स्वयं के एक तेज श्वेत दिव्य शक्ति को प्रकट किया.

आदि शक्ति के ही एक रूप से बहुत तेज स्वरूपी चार भुजाओं वाली देवी जिनके हाथों में एक बिना एक कमंडल एक पुस्तक और एक माला विराजमान था. उसके बाद जैसे ही अपने बीना से स्वर निकाल ले तो उसके मधुर ध्वनि से पूरे जगत में ही जीवन आ जाता है समस्त संसार में शब्दों और कलाओं का संरचना होने लगता है. तभी उसे तेज स्वरूप प्रकाश पुंज वाली देवी का नाम सरस्वती पड़ जाता है. 

तब से संपूर्ण जगत में माता सरस्वती के प्रकट होने के हर्ष उल्लास के रूप में सरस्वती पूजाकी आयोजन की जाती है और सरस्वती पूजा को धूमधाम से मनाया जाता है. माता सरस्वती के बारे में यह भी कहा जाता है कि जब भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने उनके नेक कार्यों से खुश होकर वरदान देते हुएकहा था कि इस पूजा को हर वर्ष बसंत पंचमी के दिन विद्या तथा कला की देवी के रूप में सरस्वती की पूजा की जाए.

सरस्वती पूजा कहां-कहां मनाया जाता है ? (Saraswati Puja Kaha kaha manaya Jata hai )

हर साल मनाई जाने वाली बसंत पंचमी के दिन Saraswati Puja को भारत लगाया नेपाल, बांग्लादेश, इत्यादि देशों में बसंत पंचमी के ही दिन सरस्वती पूजा कापूजा धूमधाम से की जाती है. 

सरस्वती पूजा कैसे मनाई जाती है? (Saraswati Puja Kaise Manaya Jata hai )

हिंदू शास्त्रों के अनुसार Saraswati Puja को प्राचीन समय से ही धार्मिक तथा संस्कृत रूप से देवियों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है. हिंदू शास्त्रों के अनुसार विद्या तथा संगीत की देवी कहे जाने वाली माता सरस्वती की पूजा सभी के लिए लाभदायक है. विशेष कर स्कूल केविद्यार्थियों. हिंदू मान्यताओं के अनुसार माता सरस्वती की पूजाहर साल बसंत पंचमी के दिनलोग सबसे पहले एक साफ सुथरी जगह परमाता सरस्वती की मूर्ति तथा फोटो को विस्थापित की जाती है और उसके बाद माता सरस्वती का श्रृंगार की जाती है.

और उसे जगह को पूरी तरह से सजाई जाती है. माता सरस्वती के चरणों में गुलाब अमीर अक्षत इत्यादि अर्पित की जाती है तथा दीपक जलाए जाते हैं. पूजा में पंडित जी के अनुसार पूरी तरह से विधि विधान के साथ पूजा को संपन्न की जाती है. पूजा संपन्न होने के बाद बनाई गई प्रसाद को भक्त जनों के समक्ष बाटी जाति है.

Saraswati Puja के दिन कहीं सारे शैक्षणिक स्थान में या स्कूल कॉलेज में भव्य रूप से माता सरस्वती की पूजा आज की जाती है इस दिन लोग सवेरे उठकर स्नान करते हैं. और स्नान करने के बाद पीला रंग की वस्त्र धारण कर लेते हैं क्योंकि कहा जाता है की माता सरस्वती को पीला रंग बहुत ही लुभाव न होता है जिसके कारण इस दिन पीले रंग का वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है.

प्राचीन काल में जब सरस्वती पूजा गुरुकुल में मनाई जाती थी उसे वक्त माता सरस्वती के प्रति मन के समक्ष सभी विद्यार्थियोंअपने उज्जवल भविष्य के लिए प्रार्थना करते थे तथा आशीर्वाद की कामना करते थे. आज भी इसी प्रकार से माता सरस्वती की पूजा हर साल की जाती है.

इसके लिए स्कूल कॉलेज में विद्यार्थी लोग एकजुट होकर माता सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करने में जुट जाते हैं तथा उनके पूजा के लिए पूरा व्यवस्था करने में लग जाते हैं. पूजा की पूरा तैयारी हो जाने के बाद हरसोलश के साथ माता सरस्वती की पूजा की जाती है तथा विद्यार्थी माता सरस्वती से अपने-अपने भविष्य तथा विद्या की विकास के लिए कामना करते हैं उसके बादमाता सरस्वती की आरतीकी जाती है और आरती खत्म हो जाने के बादसभी लोगों में प्रसाद वितरण की जाती है.

पूजा खत्म हो जाने के बाद अगले दिन पूजा कीअंत दिन आरती के साथ पूजा को समापन की जाती है उसके बाद सब मिलकर माता सरस्वती की प्रतिमा को नजदी की तालाब में ले जाकर विसर्जन करके माता सरस्वती पूजा की समापन करते हैं . 

निष्कर्ष

इस लेख में हमने जाना माता Saraswati Puja पर निबंध के बारे में यदि आप भी अपने स्कूल की प्रोजेक्ट के लिए माता सरस्वती पूजा के बारे में निबंध लिखना चाहते हैं तो यहां से आप अपनी निबंध के लिएराय ले सकते हैं.आशा करता हूं आप लोगों को यह लेकर जरूर पसंद आई हो. यदि किसी तरह का कोई सुझाव या साला है तू. नीचे दी गई कमेंट बॉक्स में कमेंट जरुर करें धन्यवाद.

यह भी पढ़ें

FAQs.

Q. 24 में सरस्वती पूजा कब है?

A. 14 February 2024

Q. सरस्वती माता किस दिन है?

A. वसंत पंचमी

Q. संस्कृत में सरस्वती को क्या कहते हैं?

A. ॐ सरस्वत्यै

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